दर्द है, तो जी लेने दो.
सिसक -सिसक कर ही सही
दो कदम चल लेने दो.
दर्द नहीं रहा तो हम नहीं होंगे।
जब तक जिन्दा हैं
जाम पी लेने दो.
Rifle SIngh Dhurandhar
दर्द है, तो जी लेने दो.
सिसक -सिसक कर ही सही
दो कदम चल लेने दो.
दर्द नहीं रहा तो हम नहीं होंगे।
जब तक जिन्दा हैं
जाम पी लेने दो.
Rifle SIngh Dhurandhar
जब दिल टुटा था, संभालना मुश्किल था
अब संभल गया हूँ, तो फिर टूटना मुश्किल है.
इस जमाने की भी क्या खूबी है?
की इसमें बेवफा को, बेवफा ही कहना मुश्किल है.
जो करते हैं वादे हर घड़ी प्यार -मोहब्बत के
उनका किसी पल भी, वादों पे टिकना मुश्किल है.
हया सारी निगाहों की उनकी है झूठी
की इस समंदर में किसी का भी टिकना मुश्किल है.
क्या पालोगे धुरंधर उनके आगोश में जाकर?
जिनके काँधे पे आँचल का भी टिकना मुश्किल है.
Rifle Singh Dhurandhar
जब दिल टुटा था तो संभालना मुश्किल था
अब जब संभल गया हूँ, तो फिर टूटना मुश्किल है.
मुझसे मत पूछो, वो कैसी हैं, कहाँ हैं?
बता दो उनको, हम कैसे हैं, कहाँ है?
मैं कोई दुर्योधन-दुशाशन नहीं जो उनका चीरहरण करूँ
ना उनका चरित्र ऐसा, जिसे पतित करने को मैं द्रुत-क्रीड़ा रचूं।
Rifle Singh Dhurandhar
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.
पिता तुमसे बिछुड़कर अब मेरा जीवन धूल सामान है.
कहाँ मैं फिर उड़ा कभी, कहाँ अब वो मेरा आसमान है?
दाना तो चुग ही लेता हूँ, पर कहाँ अब वो मेरी उड़ान है?
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.
एक -एक करके हार रहा हूँ, हर युद्ध मैं बिना आपके रण में
विफल हो रही है मेरी हर चेष्टा, अटल मेरा परिणाम है.
विनती अब बस इतनी ही है, अगर सुन रहा है विधाता
हर जन्म में पुत्र आपका रहूं, हृदय की बस ये ही पुकार है.
गोद में तुम्हारे जो अमृत मिला, वो कंठ पे बन के अनंत प्यास है.
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है
Rifle Singh Dhurndhar
वो अब लौट नहीं सकती
और मैं दिल बदल नहीं सकता।
पति, देवर, सास-ससुर, बच्चे
जिंदगी का हर रंग जिया उसने।
मैं उस मुकाम पे आ गया की
तन्हाई के सिवा कोई रंग
भर नहीं सकता।
Rifle Singh Dhurandhar
ताउम्र प्यार की आरजू रही.
ताउम्र वो ख़्वाबों में आती रहीं।
ताउम्र सीने में एक बेचैनी सी रही
ताउम्र वो छज्जे से मुस्कराती रहीं।
ताउम्र मैं दौलत कमाता रहा
ताउम्र झोली मेरी खाली रही.
ताउम्र मेरे हौसले टूटते रहे
ताउम्र माँ मेरी, हौसले बढाती रही.
Rifle Singh Dhurandhar
मौजों ने साहिल तक आते-आते अपना रंग बदला है
सज-धज के निकली थीं, अब सादगी का चोला है.
संग सांखियाँ थीं, जवानी थी, अल्हड सब, मस्तानी थीं
आते-आते यहाँ तक सबको बिछुड़ना है.
ऊँची हसरते लेकर निकले थे जो लम्बी उड़ान पे
ऐसे मंजे उस्तादों को भी अंत में हाँ थकना है.
Rifle Singh Dhurandhar
किसी नजर की तलाश ही हैं जिंदगी का भटकाव
ढल जाती है जिंदगी फिर बिना किसी पड़ाव।
रुत तो कई आयी पर रहा मुसाफिर का वो ही हाल
नीचे छाले, ऊपर धुप, ना छावं ना कोई आराम।
राहें तंग, कंकर -पत्थर सी, मंजिल भी रंगहीन-उदास
धैर्य, प्रार्थना, प्रयास से ही संभव उत्कर्ष -उत्थान।
Rifle Singh Dhurandhar
अभी तुम हसीन हो, अभी नाजुक बड़ी हो
अभी मिलेंगे तुमको गली-गली में मजनू।
अभी तुम नई हो, कातिल छरहरी हो
अभी तुम्हारे लिए चमकेंगे सारे जुगनू।
जिधर तुम डाल दो अपनी ये दिलकस नजर
उधर ही बैठे हैं तुमपे लुटाने को सभी आबरू।
Rifle Singh Dhurandhar
प्रेम होता है जिस्म से और दिल रोता है
नजर के खेल में बस ये ही पेंच होता है.
रोकने से रुक जाए ये मुमकिन नहीं
बेवफाओ का बस ये ही अंदाज होता है.
Rifle Singh Dhurandhar