फासला


ये रौशनी चेहरे पे, ये सादगी चेहरे पे
किस्मत में फासला लिख गया
वरना रखते हम आपको
जीवन भर अपनी पलकों पे.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मतें -द्वन्द


शहर को क्या पता है किस्मतें -द्वन्द का?
मेरे दिल से पूछों जिसे नशा है तुम्हारे अंग – अंग का.

उलझनों में बांध के क्या मोहब्बत करोगे?
ख्वाइस तुम्हे दौलत की और मुझे तुम्हारे वक्षों का.

राहें बदल – बदल कर कौन सी मंजिल पा लोगे?
स्थिर होने पे बुद्ध के, द्वार खुला था ज्ञान का.

परमीत सिंह धुरंधर