जितना भी प्यासा हूँ मैं
ये तेरी नजरों का साया है.
लड़ता हूँ पेंच मैं भी बहुत
मगर ये तेरा मोहल्ला है.
क्या संभालोगे खुद को तुम
जवानी में बहुत नशा है.
इस उम्र में कब कहाँ किसी ने?
कोई घर बसाया है.
परमीत सिंह धुरंधर
जितना भी प्यासा हूँ मैं
ये तेरी नजरों का साया है.
लड़ता हूँ पेंच मैं भी बहुत
मगर ये तेरा मोहल्ला है.
क्या संभालोगे खुद को तुम
जवानी में बहुत नशा है.
इस उम्र में कब कहाँ किसी ने?
कोई घर बसाया है.
परमीत सिंह धुरंधर
तुमसे मोहब्बत में बड़ी प्यास मिलती है
तू तो उड़ जाता है, संग बस तन्हाई रहती है.
परमीत सिंह धुरंधर
धरा पे मैं फिर से
कोई भगीरथ बनूँगा क्या?
मेरे लिए हे शिव,
आप अपनी जटायें खोलेंगे क्या?
जब मन भय से ग्रस्त हो
कर्म पे बढ़ा अटल हो
मैं पुकारूँ,
तो हे शिव आप मेरे लिए आवोगे क्या?
मैं छोडूंगा नहीं हे शिव चरण तुम्हारे
तुम सुनो, ना सुनो,
रहूँगा तुम्हे पुकारते
मुझे यूँ आँखों की धारा में
हे शिव डूबता छोड़ोगे क्या?
परमीत सिंह धुरंधर
ना रखा कर रुख पे यूँ पर्दा मेरी जान
चाँद के दीदार का हक़ हमें भी है.
परमीत सिंह धुरंधर
ये रौशनी चेहरे पे, ये सादगी चेहरे पे
किस्मत में फासला लिख गया
वरना रखते हम आपको
जीवन भर अपनी पलकों पे.
परमीत सिंह धुरंधर