इंसानो की बस्ती का हर रंग फीका है,
हर शख्स को सूरज से ही शिकवा है.
सब कह रहे है चाँद में दाग ही नहीं,
सूरज ने अपनी किरणों से इसे झुलसाया है.
हर मोड़ पे गूंजती है सैकड़ो आवाजें,
हर शख्स ढूंढता है चोर कहाँ है.
सब कह रहे है की सूरज ने धोखा किया है,
इस उजाले में सबका रंग दीखता है.
हर शख्स के दामन में रंग काला है.,
कितना ढूंढा दिया लेकर, हर गली, हर कूचे में.
मैं अकेला हूँ तन्हा आज भी,
मेरे रंग का कोई मीत नहीं मिला है.
खूबसूरत हैं वो लोग जो भीड़ में छुपे हैं,
धुरंधर सिंह की किस्मत में बस ये ख़्वाब लिखा है.
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These are just related to life as philosophy.
तड़का
अभी रात मेरी बाहों में थी,
की सुबहा आके छनकने लगी.
मीठे-मीठे ख़्वाबों में धुरंधर के,
हकीकत का तड़का लगाने लगी.
गर्व
सागर की लहरे उछलती रहीं,
नौका मेरी डुबाती रहीं।
किनारों को मेरे डूबा के,
मुझे भटकाती रहीं।
ये सच है की,
मैं कुछ पा न सका जीवन में।
पर धुरंधर को राजपूत होने,
का गर्व कराती रहीं।
प्रयास
उल-जुलूल,
हरकते,
अब बंद कर
ए दिल,
कब चाँद धरती पे,
आने वाला हैं.
प्रयास ही करना है,
तो, नहर बनाने में कर,
कब तेरी फसलों को,
सागर आके सींचने वाला है.
कलियाँ जो खिल नहीं सकती
बागों में तेरे,
उनके लिए, अपनी जमीं को,
न छोड़, परमीत
की कब कलियों से,
बचपन पलने वाला हैं.
जीवन
निराश मन,
बेताब मन,
बेचैन मन,
वक्त के दोराहे,
पे खड़ा,
किस तरफ जाए,
दोनों तरफ हार है.
हार कर स्वीकार करूँ,
अपनी पराजय,
या सफलता के चुम्बन,
के सपने सजोंते-सजोंते,
मिटा दूँ, परमीत
ये जीवन।