त्याग की महत्ता


त्याग जीवन में सबसे महत्वपूर्ण और महान काम है.  चाहे कलयुग हो या सतयुग हो, वीर वही है जिसने त्याग किया है. और गुरु गोबिंद सिंह जी से बड़ा त्यागी कोई नहीं। भगवान् राम एक अवतार त्रेता में और गुरु गोबिंद सिंह जी कलयुग में अवतार सिर्फ मानवता  को त्याग की महत्ता बताने के लिए हुआ था.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तुम अब जावां हो गयी हो


समुन्द्रों में अब तो, उठा दो लहरें,
तुम अब जावां हो गयी हो, बिखर दो ये जुल्फें।
तुम्हारा शर्माना माना की बहुत ही जायज है,
पर कभी तो बेशर्म बन कर, उठा दो ये पलकें।
कब तक काजल से ढकोगी खवाबों को सुला के,
कभी तो जिला दो इन्हें गिराके सब दीवारें।

 

परमीत सिंह धुरंधर

It’s good to be used


It’s good to be used,
But not to be misused.
so, don’t cry every time,
whenever I see you.
If you need me,
let me know, let me know.
But if you need just a shoulder,
let me go, let me go.
Rivers flow,
Just to loose all their water.
Trees grow,
Just to invite insects to eat their fruits.
If you want to loose,
let me know, let me know.
But if you still want to win,
let me go, let me go.

Parmit Singh Dhurandhar

अंदाज


जिसे जिंदगी भर ग़मों ने लुटा,
उसके मुस्कराने का अंदाज तो देखो।
आंसूं निकलते भी हैं आँखों से,
तो उनके निकलने का अंदाज तो देखो।
कौन नहीं है?
जिसने नहीं कहा अपने जीने के अंदाज को.
मगर जब ये कहें,
तो इनके कहने का अंदाज भी तो देखो।

 

परमीत सिंह धुरंधर

युद्ध निरंतर होगा


तुम थाम लो समंदर,
हम आकाश थामेंगे।
अब युद्ध निरंतर होगा,
या तो जीत हो मेरी,
या हम प्राण त्यागेंगे।
अब खोने को कुछ नहीं बचा,
सिवा इस शरीर के.
इसलिए आखिरी साँसों तक,
तुम्हारे विरोध में हर आवाज,
की हम हाथ थामेंगे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है


मुझे हार बर्दास्त नहीं,
और जीत की कोई चाह नहीं।
संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है,
जब तक मंजिल,
आ जाती मेरे पास नहीं।
तारो-चाँद से, ये माना,
की किस्मत का है लेना – देना।
मगर मेरे हौसलों पे,
इनकी गति का कोई असर नहीं।
हर चट्टान मैं तोड़ दूंगा,
अगर वो मेरे राहों में आये.
उबड़-खाबड़ राहों के बिना,
मिलती धरा को कभी प्रवाह नहीं।
संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है,
जब तक मंजिल,
आ जाती मेरे पास नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

गुनाहों की चादर


दुनिया की भीड़ में,
मैं खो गया.
ऐसा आप सोचते हो,
ये हकीकत नहीं हैं दोस्तों।
हकीकत तो ये है की,
गुनाहों की चादर,
इतनी लंबी है उनकी,
की मैं आसानी से छुप गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

जिंदगी सबकी अधूरी ही है


समुन्द्र की लहरों,
पे बैठा हर इंसान,
बस किनारों को देखता है.
और किनारों पे बैठा इंसान,
लहरों को देखता है.
जिंदगी सबकी अधूरी ही है.
कोई अँधेरे में,
तन्हाई में रोता हैं,
तो कोई भीड़ में, महफ़िल में,
अंदर-ही-अंदर,
सुलगता है, सुबकता है.
जिंदगी सबकी अधूरी ही है.
कोई हुस्न की यादों में,
कोई हुस्न की बाहों में,
आकर, समाकर,
ओठों को चूमकर भी,
किसी – न – किसी प्यास में,
निरंतर, अविराम, ही जलता है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हम तो उग्र्र हैं अपनी जवानी में


हम भी कम नहीं हैं उस्तादी में,
बस अंतर इतना है,
की वो मौन हो के खेलते हैं बाजियाँ,
और हम थोड़े वाचाल हैं अपनी जवानी में.
उनकी तमन्ना की रौंद दें हर किसी को,
और मैं तो रौंद ही देता हूँ,
जो टकराता हैं मुझसे मेरी राह में.
हम भी कम नहीं हैं छेड़खानी में,
बस अंतर इतना है,
की वो इंतज़ार में बैठे रहते हैं,
की कब एकांत हो.
और हम तो उग्र्र ही हैं अपनी जवानी में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

इंसान बनने का मजा ही कुछ और है


शौक मुझे भी है की खुदा बनू,
मगर इंसान बनने का मजा ही कुछ और है.
ताकत के बल पे,
तो शैतान भी दुनिया को अपना बना ले.
मगर संघर्ष और बुलंद इरादों का नशा,
ही कुछ और है.
मैं मौन हूँ,
ये मेरी कमजोरी नहीं।
सपनों को सीने में दबाने का,
मजा ही कुछ और है.
ये निश्चित है की एक दिन,
तुम्हे कसूँगा अपनी इन बाहों में.
मगर जवानी में तनहा विरह की आग में,
जलने का नशा ही कुछ और है।

 

परमीत सिंह धुरंधर