सवाल


उस ने फिर मेरा हाल पुछा है कितना मुश्किल सवाल पुछा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मैं दिया जलाता रहूँगा


लड़ाई होगी,
जब तक आसमान मुझे मेरी जगह न दे दे.
मैं दिया जलाता रहूँगा,
हर अँधेरी राह में,
जब तक सूरज मेरे आँगन में अपनी किरण न बिखरा दे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तमन्ना


सुबह तो हो जाती है तुम्हारी आँखों से,
ना जाने कब रात होगी तुम्हारी जुल्फों में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

जंग तो लड़ना होगा


जीत के लिए,
जंग तो लड़ना होगा।
सत्ता पाने के लिए,
सत्ताधीशों को उखाड़ना होगा।
न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते,
यूँ सर झुका कर अब इनसे।
न्याय चाहिए तो,
आँखे मिलाकर,
न्यायधीशों को ललकारना होगा।
जिन्हें प्यार से आहार चाहिए,
वो बैठ जाएँ अपने घर और गोशालों में.
सबेरा देखने वालों को,
इन अंधेरों से गुजरना होगा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Instagram


विद्रोही कलम ही सिर्फ Bold हो सकती है,
बाकी उनकी Boldness तो सिर्फ Instagram पे ही दिखती है.

 

Just by posting your pic on the Instagram, you can not show your boldness or courage. A courageous  person has to be on the road to fight for the poor people.

 

Parmit Singh Dhurandhar

भिखारी – मदारी


दाने – दाने पे,
उसने मेरा नाम लिख दिया।
यह मेरी किस्मत नहीं,
ना भाग्य है.
बल्कि ऐसा करके,
उसने मुझे भिखारी,
और खुद को मदारी लिख दिया।
मैंने भी गमझे से पेट में,
विकराल होते भूख को,
बाँध दिया।
दुपहरी में पीपल के नीचे,
खाट डाल के लेट गया.
मुझे मेरी गरीबी में भी खुसी हुई,
की आज मैंने,
उसके ऊँचे महलों के दर्प,
को बुझा दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

सिंह सा दहाड़ लेता है


जिंदगी ने हर तरफ से तन्हा कर दिया,
उमीदों के हर किनारे को तोड़ कर,
बे- आसरा कर दिया।
फिर भी नशों में बहता ये खून,
जो राजपूती है,
उछाल लेता हैं,
उबाल लेता है.
संकट के हर घड़ी पे,
ये सिंह सा दहाड़ लेता है.
मैं मिटने की राह पर रहूँ,
साँसे टूटने की कगार पे रहे.
छाने लगते हैं जब भी,
हार की आंशका के ये काले बादल।
गिरते – गिरते भी, धूल में धूसरित होते भी,
ये खून, दुश्मनों को ललकार देता है.
मुझमे फिर से अहंकार भर,
जोश भर,
आखिरी क्षणों में भी,
राण-भूमि में, अरुंओं के सम्मुख,
नाव-योवन प्रदान करता हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Be in P<0.05


For your dream you have to die,
Does not matter, how high you fly.
टूटे रिश्तों को बचा लो,
इसी में हैं सबकी भलाई।
The world is always unfair,
As, it goes behind the average.
If you want to excel,
You have to be in P<0.05.
For your dream you have to die,
Does not matter, how high you fly.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Dream


For your dream, You have to die.

 

Parmit Singh Dhurandhar

When you are not with me


I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I cannot imagine life,
When you are not with me.
ये काली – काली रातें,
कैसे काटूंगी।
जो तुम ना मिले मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like my lips,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I just want to die,
When you are not with me.
I don’t like to lie,
But it is true.
I don’t like to die,
But I have to.
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
प्यासी हूँ मैं प्यासी,
तेरे होंठों की.
जो तू ना मिला मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.

 

Parmit Singh Dhurandhar