सवाल


उस ने फिर मेरा हाल पुछा है कितना मुश्किल सवाल पुछा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तमन्ना


सुबह तो हो जाती है तुम्हारी आँखों से,
ना जाने कब रात होगी तुम्हारी जुल्फों में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

You are such a beauty


You are such a beauty,
Eyes forget to sleep.
Believe me or not,
Except you,
I have no other dream.
I don’t know,
When my sky will gets its full moon.
But hope is life,
It will happen later or soon,
That your heart will beat,
And beat for me.

 

Parmit Singh Dhurandhar

निगाहें


निगाहें ही काफी हैं,
यह दर्द जगाने के लिए.
आदाओं को रखों,
घूँघट उठाने के बाद,
बिजली गिराने के लिए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

You are Jwala Gutta


 

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I am Parmit Crassa,
You are Jwala Gutta.
मिल जाएँ हम तो,
लूट लें ये सारी दुनिया।
I am Parmit Crassa,
You are Jwala Gutta.
नजर में कुछ भी नहीं,
बस जिगर में तुम हो.
तुम मान जाओ तो,
बसा ले अपनी छोटी सी दुनिया।
I am Parmit Crassa,
You are Jwala Gutta.

Figure was from google image.

परमीत सिंह धुरंधर

Jwala Gutta


हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों बसा लें अपनी,
एक छोटी सी दुनिया।
जिसमे एक चूल्हा हो,
जिसको तुम जलाती हो.
जिसमे एक मुन्ना हो,
जिसको हम खेलाते हों.
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों सजा ले अपनी,
ये छोटी सी बगिया।
जब तुमको चोट लगे,
मैं हल्दी छाप दूँ.
जब मुझको भूख लगे,
तुम मछली बना लेना।
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों बना ले अपनी
छोटी सी कुटिया।
मैं कंगन खरीद लाऊं,
तुम दिन – भर ख़नक़ाना।
मैं साड़ी पहनाऊं,
तुम मुझको नहलाना।
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों एक कर लें,
अब अपनी खटिया।

For Jwala Gutta

 

परमीत सिंह धुरंधर

तो क्या हुआ?


ये नजर,
ये हुस्न,
ये रंग तेरा,
मेरे नसीब में नहीं तो क्या हुआ?
मेरी उम्मीदों को,
सवारती तो हैं.
तेरे होंठ,
तेरी जुल्फें,
तेरा आगोश,
मेरा नहीं तो क्या हुआ?
मुझे ख्वाब दिखाती तो हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मचल ही जाता है प्यार में


आँखों के सपने हजार बार टूटे,
फिर भी दिल धड़क ही जाता है प्यार में.
मेरे दर्द पे वो हजार बार मुस्कराती हैं,
पर दिल भूल ही जाता है उनके दीदार पे.
इश्क़ भी है अपना मरुस्थल जैसा,
जहाँ एक बून्द भी नहीं बारिश की.
पर देख कर हुस्न को,
दिल मयूर सा मचल ही जाता है प्यार में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

वो हमें जवान कर गए


वो अपनी मोहब्बत का,
हमपे यूँ सितम कर गए.
हम अब तन्हा – तन्हा रहते हैं,
वो जवान कर गए.
नासमझी थी, या शर्मो – हया,
सब दूरी मिटा के वो सबसे दूर कर गए.
हम अब तन्हा – तन्हा रहते हैं,
वो जवान कर गए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

त्रिया-चरित्र


गली – गली में देखा तुझको,
गली – गली में शोर है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
कल से गायब मेरी चुनर हैं,
और चोली भी तंग है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
तू तो हो गयी है वावरी,
उस पड़ोसन की सुन – सुन के.
उसके त्रिया-चरित्र का,
ये सब एक नया झोल हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर