कैसे तुम्हारा दिल जीत लूँ?


मैं हिमालय पे अटल तपस्या कर दूँ,
मैं सागर में बैठ के, साँसों को रोक लूँ.
मगर मैं फिर भी अधूरा हूँ,
कैसे इस अपने दिल को समझाऊं।
मैं बादलों से बिजली को अलग कर दूँ,
मैं भूमंडल से ही ब्रह्माण्ड को चालित कर दूँ.
पर सब ज्ञान मेरा बेकार है,
क्यों की मैं नहीं जानता ए देवी,
कैसे तुम्हारा दिल जीत लूँ?

 

परमीत सिंह धुरंधर

The girl at the Boston airport


The girl at the Boston airport,
Sweet, small
And like a doll.
The color of the eyes,
And her face changed,
When she saw so many books,
In a single bag.
Something happened,
Inside her heart.
She forgot all her knowledge,
And,
Started looking for her boss.
She thought the hard drive,
As a battery.
And tried hard to pull,
The bag on the trolley.
I told, “excuse me miss, it is very heavy”.
In the last,
With the red face,
She gave a special smile.
And her eyes wished me “happy journey”.

 

Parmit Singh Dhurandhar

कटे पंखों से भी उड़ सकता है पंक्षी


कटे पंखों से भी उड़ सकता है पंक्षी,
अगर उसके घोसलें में बच्चों की चहचहाट हो.
चूल्हे की आग से झुलसती जिस्म को क्या पता प्यास की?
अगर उसके बच्चों के मुख पे खिली मुस्कराहट हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Respect Mom and not the religion

मेरा हाँ होगा


तुम बोलोगी तो प्यार होगा,
तुम साथ चलोगी तो प्यार होगा।
मेरा जान तुम्हारी हर पसंद पे,
मेरा हाँ होगा।
दुस्मनी है मगर ज़माने से मेरी,
मेरी राहों पे काँटों का अम्बार होगा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

फकीर शहंशाहे-हिन्द


तुम्हारी लबों से होकर गुजरा जो पल,
फीका लगने लगा ये ताजो – ये तख़्त।
एक पल में सब गुरुर बिखरने लगा,
कितना बड़ा फकीर है ये शहंशाहे-हिन्द।
परमीत सिंह धुरंधर

ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो


माई कहले बारी,
तहसे हम बात ना करीं,
की तू बड़ा बदनाम बड़ा हो.
हमार माई कहले बारी,
तहके घर ले चलीं,
की ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो.
चलअ, हटअ पीछे, हमके मत छेडअ हमके,
बाबुल से पहले मांगअ ई हाथ हो.
देखअ ताहरा खातिर कंगन ले आइल बानी,
पाहिले पहनाएम ई ताहरा हाथ हो.
देखअ हाथे तक रहअ, पहुँचा मत धरअ,
हमार धड़कअता अब दिल हो.
त छोड़अ माई – बाबुल के चिंता,
अब हो जाएगअ सार खेल हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं


तेरी आँखे मुझसे कह रही है,
यूँ साँसों की दूरी अब अच्छी नहीं।
तो छोड़ दे ये शर्म ए गोरी,
तेरी कोरी जवानी अब अच्छी नहीं।
कब तक संभालेंगे बाबुल तुझको,
ढलकने लगा है तेरा आँचल।
यूँ मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं।
अंगों में तेरे इतना कसाव,
जैसे मन में छुपा हैं कोई डर.
यूँ डरती – खामोश जवानी अच्छी नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

 

 

किसी भी हुस्न में ऐसी विरह की आग नहीं


हम चाहें हुस्न वालों को,
मेरी ऐसी औकात नहीं।
सीधे -सादे इंसानों के लिए,
हुस्न के पास कोई सौगात नहीं।
इससे अच्छा की लगा दे जिंदगी,
अगर खुदा की राह में,
तो कोई बरक्कत हो जाए.
मक्कारी के अलावा,
हुस्न की झोली में कुछ भी नहीं।
कल रात मेरी कलम ने मुझसे कहा,
२५ दिन हो गए,
तुमने मुझे छुआ तक नहीं।
किसी के जिस्म को क्या छुऊँ?
किसी भी हुस्न में,
ऐसी विरह की आग नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

There is no desire left for you as my brain feels attraction for creativity and simplicity.

तुम्हारी आँखे


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मेरे इरादे बदल देतीं हैं तुम्हारी आँखे,
मेरे सपने सजा देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
दूरियां जो हैं हमारे दरमियाँ,
उसे कितना छोटा बन देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
सम्पूर्ण से लगते इस जीवन को,
तुरंत, एक पल में, अधूरेपन का एहसास,
दिला देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
कितना भी मयखाने से पी लूँ, उठाकर,
सीने में प्यास जगा ही देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
तुम ज्वाला बनके धधकती रहो,
जलाती रहो, मिटाती रहो.
बस यूँ ही कभी-कभी,
हमसे लड़ा लो तुम्हारी आँखे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Its your eyes, which is keeping me alive. Its your eyes which makes me to try for my dream. Its your eyes which makes me to feel your breath, your closeness. All my feelings, my desire and my energy is due to your eyes. Its only your eyes …only your eyes….that is my life……

तो फिर से वो मंजिल नजर आई


बड़े दिनों बाद याद तुम्हे मेरी आई,
चलो कुछ नहीं,
आखिर तुम परदे से बाहर तो आई.
हम भी मसरूफ थे,
जाने किस मंजिल को पाने के लिए?
तुम दिखे,
तो फिर से वो मंजिल नजर आई.

 

परमीत सिंह धुरंधर

When I saw your face, I realized my mistake that I had chosen wrong path. My goal is you and I don’t know how I forgot that.