कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू


कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
अइसन बा ताहर नजरिया, की चकाचक लागेलू।
कजरा पे तहरा बहकल सारा छपरा,
आ लहंगा से तहरा लहकता देवरिया।
जब करेलू टाइट चोली, मीठा ख़्वाब लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
हिरणी सी चलके, मोह लेलु मोहनिया,
देख गदराइल जवानी, जाम भइल मलमलिया।
जब उड़ावेलु ओढ़नी, जिला टॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।

परमीत सिंह धुरंधर

I wrote this after listening this video

The hot smoking girl


The hot smoking girl,

Black and tall.

With denim jeans,

And with a Gold Flake,

She held my hand.

We walked together,

At Rajiv Chowk .

Parmit Singh Dhurandhar

पत्नी


गले – से – गले मिलके,
तुमने संभाला है ओठों को.
वरना हम तो बहक ही चुके थे,
देख, शहर में मयखाने को.
मिलती है अनगिनित परियाँ,
रोज, मेरी रात बसाने को.
तुम ना होते तो बिक ही जाते,
आँचल उनका सजाने को.
कई साल बीते, यूँ ही,
एक ही साड़ी पहने- पहनते.
और हर मास, मुझे नया,
सूट तुम सिलवाती हो.
ये तुम ही हो जिसने बचाईं है,
दीवारें मेरे घर की.
पर दुनिया भर में कहती हो,
नाम मेरा, अहम मेरा बचाने को.
बाहों – में – बाहें डालकर,
तुमने ही बचाया है जीवन को.
वरना हम तो मिट चुके थे,
कब का, खाते – खाते राहों में ठोकरों को.

परमीत सिंह धुरंधर

प्यार


मैं रातों को जलता रहा,
वो दिन भर सुलगती रहीं।
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम मिल भी न सके दो घड़ी.
वो मुड़ – मुड़ के देखती रहीं,
मैं हर पल राहें बनता रहा.
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम चल भी न सके संग दो घड़ी.

परमीत सिंह धुरंधर

जीवन


तेरी आँखों का रंग,
लगता है जीवन।
मेरी साँसों का समंदर बनके,
गोरी ले जा हंस के जवानी मेरी।

परमीत सिंह धुरंधर

खूबसूरत बंगलें


खूबसूरत बंगलों में मोहब्बत की गुंजाइस ही क्या,
शिकारी शिकार करे तो फिर बचने की गुंजाइस ही क्या।
लो जल के रख दिया है दीपक, तुम संवर के बैठो तो ज़रा,
घूँघट न सरक जाए खुद-बी-खुद तो मेरी मोहब्बत ही क्या।
मिल जाएंगे तुम्हारे हुस्न के दीवाने कई हर मोड़ पे,
जिसके सीने में तुम धड़कों, उसका हर मोड़ पे मिलना ही क्या।

परमीत सिंह धुरंधर

एक चाँद आता है


अक्सर रातों में, मेरे ख़्वाबों में,
एक चाँद आता है, बादलों में.
वो करता है इसारे, जुल्फों को सवारें,
मैं देखता हूँ खुली पलकों से.
बदली के आर से, नैनों के तार से,
धड़कनो को मेरे, वो छू के जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
रोसनी दुनिया की उसके आँखों से ,
चांदनी रातों की उसके आँचल से.
मैं तरपता हूँ, मैं तरसता हूँ,
जब उसका आँचल ढलक जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
सोया नहीं मैं कितनी रातों से,
जागता हूँ यूँ ही उसकी राहों में.
सिमट आती हैं सारी हवाएँ,
चुने को उसके बदन को.
सज – सवर के जब वो निकलता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.

परमीत सिंह धुरंधर

मीठे दीये


तेरे नैना मिलते है जो मेरे नैनों से,
तो पूरी रात जलते हैं ये दीये।
कैसे मैं कह दूँ,
मीठे लगते है मुझे ये दीये।

परमीत सिंह धुरंधर

शिकायत


यूँ ही शाम को,
मिला करो.
ढलती धुप में,
हमसे जरा.
यूँ ही जाम नजर से,
पिलाया करों।
चढ़ती रात में,
हम को जरा.
तुम्हारा जादू ऐसा है,
अब नहीं संभाला जाता है.
यूँ ही थाम लो,
बाहों में अपने।
बढ़ के तुम,
हम को जरा.
कल तक थी शिकायत,
क़द्र नहीं हमें आपके जज्बातों का.
अब है शिकवा की,
कुछ ज्यादा ही ख़याल आ रहा है आपका।
यूँ ही हर मोड़ पे,
शिकायत करों।
मगर हंसकर,
तुम हमसे जरा.

परमीत सिंह धुरंधर


साँसों को मेरे सनम कुछ ऐसा एहसास है,
बिखर कर भी टूट के, पास तेरे होने का ख़्वाब है.

परमीत सिंह धुरंधर