किस्मत


नीचे गिरना किस्मत का ठगना नहीं है,
कभी कभी नीचे गिरने वालों को ही जन्नत मिलते हैं.
आँखों से दो आंसू ढलके, गालो पे सुलगते हैं,
जो विरले होते हैं, वो गिरकर होंठों को चूमते हैं,
जो होते हैं और भी किस्मत के धनी,
वो और नीचे गिरकर, वक्षों में बसते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


किस्मत अच्छी कौन लाया है,
सबने यहीं पे शतरंज बिछाया है.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


तेरी पलकों पे सबेरा, तेरी पलकों से मेरी शाम है,
पर मेरी किस्मत में एक रात ही नहीं।
रोजा रखता हूँ, सजदा करता हूँ,
सब दिया मौला ने पर मेरी किस्मत में जन्नत ही नहीं।

परमीत सिंह धुरंधर