विष पीने की सनक है


हम बिहारियों की बातें,
ही कुछ अलग है.
कुछ भी नहीं है जीवन में,
पर घमंड बहुत है.
हम भगवान् शिव के ऐसे,
अनन्य भक्त हैं.
जिन्हे अमृत नहीं,
विष पीने की सनक है.
कितनों ने कोशिश की है,
हमें तोड़ने की.
वो जाने किस भीड़ में खो गए,
और हम आज भी अटल हैं.
कितनो ने हमें गवार कहा,
कितनो ने हमारा त्रिस्कार किया,
पर जीवन के संघर्ष में हम प्रथम है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर


ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर,
इंडिया को है तुमपे गर्व।
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर,
इंडिया को है तुमपे गर्व।
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर.

अब बेटी को बचाना है,
क्रिकेट उसको सीखना है,
हरमनप्रीत कौर बनाना है.
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर.
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर,
इंडिया को है तुमपे गर्व।

ऐसे खेलो अब फाइनल में,
बाट लगा दो इंग्लैंड के,
जो कर न सकी विराट -सेना,
तुम अकेले कर दो बल्ले से.
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर.
ओ हरमन – हरमनप्रीत कौर,
इंडिया को है तुमपे गर्व।

 

परमीत सिंह धुरंधर

जिस पे रख देती थी वो अपना दुप्पटा


वो क्या समझेंगें इश्क़ को?
जिनकी उम्र गुजर गयी.
हमारी जवानी तो बंध कर रह गयी,
कालेज के उस दीवार से.
जिससे चिपक गयी थी वो सहम के,
या शायद शर्म से,
जब थमा था हमने उन्हें अपने बाँह में.
वो क्या समझेंगें इश्क़ को?
जिन्होंने प्राप्त कर लिया महबूब के जिस्म को,
हमारी तो नजर टिकी रह गयी,
आज तक कालेज के उस दिवार पे.
जिस पे रख देती थी वो अपना दुप्पटा,
जब कसता था मैं उन्हें अपनी बाँह में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मैं भी त्याग करूँ सर्वश्व अपना


आवो माँ,
करें उपासना शिव – शंकर की,
हम आज साथ में.
पिता मेरे कितने भोले हैं?
रखते हैं सर्पों को भी साथ में.
सर्वश्व त्याग कर जिसने,
सिर्फ एक कैलास को थाम लिया।
अमृत दे कर जग को सारा,
जिसने स्वयं विष-पान किया।
तो आवो माँ,
चरण पखारें शिव – शंकर की,
आज हम साथ में.
पिता मेरे कितने भोले हैं?
रखते हैं सर्पों को भी साथ में.
हर जन्म में पुत्र बनूँ मैं शिव का,
ये गोद मिला मुझे सौभाग्य से.
बन कर धुरंधर शिव सा,
मैं भी त्याग करूँ सर्वश्व अपना,
जग कल्याण में.
तो आवो माँ,
आशीष ले शिव-शंकर की,
हम आज साथ में.
पिता मेरे कितने भोले हैं?
रखते हैं सर्पों को भी साथ में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कोई मिल जाए परमित सा


दर्पण भी झूठा हो गया है,
किस को अपना रूप दिखलाऊँ।
कोई मिल जाए परमित सा,
तो मैं भी इठलाऊँ।
अंग – अंग खिला है मेरा,
चुमुक बन के.
कोई मिल जाए परमित सा,
तो मैं भी चिपक लूँ.
उमरना चाहती हूँ, नदिया सी,
अपनी जवानी की अंगराई में.
कोई भर ले,
अपनी बाहों में परमित सा,
तो मैं भी बलखा लूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कहीं चोली मेरी खुल गयी


दिले – नादानी में,
कई कहानी बन गयी.
कहीं चुनर मेरी ढलकी,
कहीं चोली मेरी खुल गयी.
किसी के निशाने पे थी मैं,
तो किसी के निशाने पे था दिल.
किस -किस को संभालती,
थी बड़ी मुश्किल।
नई-नवेली मेरी जवानी में,
कई कहानी बन गयी,
कहीं पायल मेरी टूटी,
कही मेरी कमर ही टूट गयी.
रस पी कर,
उड़ गए सारे ही भौरें।
मैं बनना चाही जिसकी,
वो सौतन मेरी ले आएं.
कच्ची पगडण्डी पे,
कई कहानी बन गयी.
कहीं तिजोरी मेरी लूटी,
कही मैं ही पूरी लूट गयी.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कई चादर डाला हमने


हम उनकी खेतों में मजदुर बन के रह गए दोस्तों,
वो हुजूर बन गई, मेरी बेगम बनते – बनते दोस्तों।
कई चादर डाला हमने एक साथ औलियाओं – मजार पे,
वो बेच गई हमें, खुदा को ठगते – ठगते दोस्तों।
शर्मों – हया के पीछे, रखती हैं खंजर भी,
मौत मिली हमें ये राज खुलते -खुलते दोस्तों।

 

परमीत सिंह धुरंधर

मेरा खाट अभी तक कुंवारा है


तू माँ बन गयी चार बच्चों की,
मेरा खाट अभी तक कुंवारा है.
तेरे हुस्न का चर्चा गली-गली में,
मेरे कुंवारेपन का ढिंढोरा है.
जगमग करते महल में,
तू सोती है दिया भुझा के,
मेरे जीवन में बस अँधियारा है.
चालीस में भी बलखाती है तू,
जाने किसको रिझाने को,
मेरे बुढ़ापे का अब तक ना कोई सहारा है.
तू माँ बन गयी चार बच्चों की,
मेरा खाट अभी तक कुंवारा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तू माँ बन गयी चार बच्चों की


मैं आशिक़ हूँ तेरी नजरों का,
रहता हूँ मयखाने में,
तू माँ बन गयी चार बच्चों की,
मैं बैठा हूँ बंजारों में.
जाने क्या मिल गया तुझे?
चंद लकीरें मिटा कर.
सोना – चाँदी से तन तेरा शोभे,
हम जुगनू बन रह गए अंधेरों में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

I just need your strong biceps


You cannot be a man,
Until you hold my waist.
It does not mater,
How old you are?
I just need your strong biceps.
You cannot be a man,
Until you hold my waist.
All diamonds and rings,
I can scarify to be your dream.
It does not matter,
How poor you are?
I just need a strong house.

 

Parmit Singh Dhurandhar