धर्मराज


जहाँ पतियों ने खेली बाजी,
अपनी किस्मत बदलने को,
और दावँ पर लगाया पत्नी को,
बस खुद को बचाने को.
जब हुआ अपमान उस स्त्री का,
तो नजरे झुका ली सबने, परमीत
बस धर्मराज कहलाने को.