परमीत का चैन और परमीत का दिल


इधर गया, उधर गया
यहाँ रहा, वहां रहा
इस दिल को,
चैन कभी मिला नहीं।
कोई तसल्ली,
इस दिल को दे,
ऐसा भी,
कोई मिला नहीं।

हार से,
यह टूटा नहीं
न जीत से,
अहंकारी हुआ
कुछ देर, थमा जरूर
पर धड़कना,
इसने छोड़ा नहीं।

आज भी, धड़कता है,
कल भी, धड़केगा,
उन सुनहरे दिनों की तलाश में,
जहाँ इस की दिलरुबा होगी,
इस का चैन होगा,
प्रेम की बौछार होगी,
चैन इस की साँस होगी।