सर्वधर्म समभाव हो यारो


सर्वधर्म समभाव हो यारो
सर्वधर्म समभाव।
किसी के दर्द पे ना कोई हँसता हो
ऐसा हो मनभाव।

सबके हाथ में कलम हो
सब बढ़ाएं देश का मान.
सर्वधर्म समभाव हो यारो
सर्वधर्म समभाव।

प्रेम -धारा जहाँ बहे निरंतर
ना द्वेष का हो स्थान।
सर्वधर्म समभाव हो यारो
सर्वधर्म समभाव।

बुझ जाए जहाँ बिरहा की आग
ऐसा हो कोई एक पड़ाव।
सर्वधर्म समभाव हो यारो
सर्वधर्म समभाव।

अपना बिहार है सबका बिहार
चाहे हिन्दू हो या मुसलमान।
सर्वधर्म समभाव हो यारो
सर्वधर्म समभाव।

परमीत सिंह धुरंधर 

बिहार अपनी बूढी माई रे


हम ना हिन्दू, ना मुस्लिम
ना हम सिक्ख ना हम ईसाई रे.
हम हैं बिहारी रे बंधू
बिहार अपनी बूढी माई रे.
छपरा जिसका ह्रदय
जहाँ बहती है पुरवाई रे.
और गंगा जिस धरती पे
लेती है, बलखा – बलखा अंगराई रे.

हम जाए चाहे जहाँ
यादों में बस उसकी ही परछाई रे.
सारी दुनिया घूम ले हम चाहे
चाहे जितनी भी हो कमाई रे.
खाते हैं हम लिट्टी-चोखा
डाल के उसपे मलाई रे.
हम हैं बिहारी रे बंधू
बिहार अपनी बूढी माई रे.

परमीत सिंह धुरंधर 

घूँघट में छुप-छुप कर


धुप में ना निकलो, यूँ हजार रंग ले कर
तड़पती है दुनिया दोपहर में जल-जल कर.

सबकी निगाहें प्यास में डूबीं हैं
उसपे ऐसे न तडपावों तुन यूँ घूँघट में छुप-छुप कर.

मन है व्याकुल, जाए तो जाए किधर
भटकावों ना तुम हमें यूँ राहें बदल-बदल कर.

परमीत सिंह धुरंधर 

जोगीरा सारा रारा


सैयां काट -काट के खाये गाल रे
जैसे मालपुआ ह इ बंगाल के.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

ऐसे तो दांत न थे किसी यार के
सखी, एहीसे मीठा लागे भतार रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

कभी भाई- कभी बेटा, कभी बीबी – कभी पतोह
बुढ़ापे में मुलायम की सब लगते हैं क्लास रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

दिल्ली में ताल थोक के मनोज तिवारी है तैयार
अबकी बार, दिल्ली में बिहार -२.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

कमलनाथ के हाथ में जैकलीन की कमर
युवा राहुल बाबा पे कोई ना डाले नजर.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

बॉलीवुड में है एक मैना, बोले खरी – खरी बात
नाम है कंगना, हारे जिससे रितिक, कारन – सैफ अली खान.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

परमीत सिंह धुरंधर 

रिक्शे पे संग बैठ तो मेरी रानी


पतली कमर पे
आग लगा दूँ, हाहाकार मचा दू रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।

झुमका दिला दूँ, नथुनी दिला दूँ
तू चल मलमलिया मेरी रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।

छपरा दिखा दूँ, पटना घुमा दूँ
तू रिक्शे पे संग बैठ तो मेरी रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।

परमीत सिंह धुरंधर 

जो तू जुल्फों में सुलाए रे


तेरे दो नैना गोरी, चाँद को ललचाये रे
कैसे थामें दिल धुरंधर, जब कमर तेरी बलखाये रे?
छोड़ दूँ छपरा, छोड़ दू कचहरी
डाल दूँ खटिया आँगन में
जो तू जुल्फों में सुलाए रे.

डाल के कजरा, छनका के पायल
जवानी के आग में, तू छपरा को झुलसाए रे.
लहरा – लहरा के तेरा आँचल, बादल को पागल बनाये रे.
छोड़ दूँ छपरा, छोड़ दू कचहरी
डाल दूँ खटिया आँगन में
जो तू जुल्फों में सुलाए रे.

परमीत सिंह धुरंधर 

सीधा सा


रात का नशा है तनहा – तनहा
किसे पुकारें, दर्द है ये पुराना सा?
खाकर लाख ठोकरें भी
दिल मेरा है अब भी सीधा सा.

परमीत सिंह धुरंधर
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