Men too


I always wanted to change the world
On my first day on the campus
I saw her giving a speech
How to change the world.

Rest of the life
She spent to change my life
And rest of the life
I spent to change myself
For her happiness.

Finally, we are divorced
Her last sentence was
“The world cannot change.”
“And men too.”

Rifle Singh Dhurandhar

A coin


There is a spark in her eyes
To live with a perfect man in the future.
There is a man in her arms
She says, “you are my perfect man.”

In her speech, there are words for an ideal world
Kindness, fight against poverty,
Morality, loyalty, and equality.
There is a man in her arms, who is married
She has been asking him to divorce his wife.

On her lips, there are different shades of color
Depending on the situation, night, music
Mood, and emotions.
There is only one color in her heart.
There is darkness, darkness and darkness.

Rifle Singh Dhurandhar

लाठाधीश-2


वो कौन हैं जिसपे वसुंधरा हर्षित है?
वो कौन है जिसपे हिमालय गर्वित है?
वो कौन है जिसे गंगा है पुकारती?
वो कौन है जो मगध की तस्वीर है?

दर्प जिसके मुख पे, भल दिव्यमान है
जब लठ लिए लाठाधीश है रण में
तो क्या सिंकदर और क्या काल है?

वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
प्रखर, प्रबल, प्रचंड, प्रवीण हो
परांगत हर विद्या में, हर निति में निपुण हो.
नरों में स्वयं तुम इंद्रा हो
संपूर्ण आर्यावर्त के तुम सिंह हो.
इस पुण्य वसुंधरा पे तुम पूजित हो.
रूप में कामदेव, रण में परशुराम हो
विद्या – ज्ञान में साक्षात् वशिष्ठ हो.

वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.

Rifle Singh Dhurandhar

कहते हैं-3


कहते हैं की सफर जितना तन्हा है तेरा
उतने ही मजबूत इरादे हैं तेरे
मंजिल तक आते -आते,
महफ़िल में तुझे भी बुलाया जाएगा।

कहते हैं की गैरों की बस्ती में
अगर घर बनाया है
मेहमान तो बहुत होंगे,
अपना कोई भी एक रात न ठहर पायेगा।

कहते हैं खुदा ने भी क्या?
बनाई है जिसे कहते हैं किस्मत?
हर सफलता को मेहनत और
असफलता को किस्मत बताया जाएगा।

कहते हैं की उसने एक घर बसा लिया है
अब कुछ दिनों में उसे मंदिर बताया जाएगा।
कहते हैं की मुझे दर्द में रख तू गम ना कर
तू जो दर्द में आया, मेरा गम छलक जाएगा।

कच्ची हो या पक्की,
सड़क दूरियां मिटाती है
माँ कैसी भी हो, किसी की भी हो
रोते बच्चे को ना देखा जाएगा।

कहते हैं की होश उड़ा देती हैं
उसकी आदाएं, सब्र कर,
जवानी ढलते – ढलते,
उसको भी भुलाया जाएगा।

Rifle Singh Dhurandhar

कहते हैं-2


कहते हैं की मौसम बदल जाए
तो क्या होगा?
जो चला गया हैं
वो लौट के आएगा क्या?

कहते हैं की शादी वक्त रहते कर लो क्राससा
तो क्या होगा?
वो मेरी महफ़िल में आके नाचेगा क्या?

कहते हैं की सभी सूना रहे हैं
अपनी -अपनी बेगम के किस्से।
मगर किसी ने नहीं कहा
आज माँ-बाप ने भरपेट खाया है क्या?

कहते हैं की मैंने जिंदगी में
कुछ नहीं सीखा
जिसने सीखा, उसे बीबी को
खुश रखना आया है क्या?

कहते हैं की दीवारों के भी कान होते हैं
मगर पडोसी, पडोसी का दर्द समझ पाया है क्या?

Rifle Singh Dhurandhar

कहते हैं


कहते हैं की धुप में ना निकला करो
जवान बदन है, कुम्हला जाएगा।
ऐसे अनजान सड़क पे ना जाया करो
कोई भौंरा चुम के उड़ जाएगा।

कहते है की वो बचपन था, सुन्दर था,
जब तुम साथ में थे पिता
अब हालात ऐसे हैं, कोई कही से,
कभी भी लंगड़ी लगा जाएगा।

कहते हैं की खुद को संभाल लो
गिर जाने से पहले
भीड़ में अब कौन है?
जो दौड़ के तुम्हे उठाने आएगा।

कहते हैं की अपना दर्द किसी से ना कहो
जमाना फिर तुम्हे पत्थर का नहीं कहेगा।

Rifle Singh Dhurandhar