श्री कृष्णा – अर्जुन संवाद


तुम धरा को बदलने में माहिर
मेरा पीर भी तो बदलो।
तुम जगत के हो स्वामी
मेरा जग भी तो बदलो।

जो पंखुड़ियाँ हैं खिलने वाली
वो भी तुम्हारे रहम पे
जो कलियाँ मुरझा रहीं हैं
वो भी तुम्हारे कर्म से.
तुम सबका कल बदलने वाले
मेरा भी ये सफर तो बदलो।
तुम जगत के हो स्वामी
मेरा जग भी तो बदलो।

ऐसा क्या है जो तुमको बांधे है?
ऐसा क्या है जो तुमसे छुपा है?
शरण में, चरण में तुम्हारे
मैंने अब ये सर रखा है.
चाँद – तारों को तुमने चमकाया
अब मेरी चमक भी तो बदलो।
तुम जगत के हो स्वामी
मेरा जग भी तो बदलो।

Rifle Singh Dhurandhar

क्या लिखा है उसने मेरी लकीर में?


हम समंदर हैं दोस्तों
खारे रह गए इस जमीन पे.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

उनसे इतनी थी हाँ मोहब्बत
हर दर्द सह गए हम ख़ुशी से.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

वो जिनके लिए हम बने थे
वो खो गए कहीं इस भीड़ में.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

खुदा भी नहीं जानता है
क्या लिखा है उसने मेरी लकीर में?
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

Rifle Singh Dhurandhar

जय सियाराम


प्रेम है तो प्रेम से -३
हाँ बोलिये
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

मन को जो बाँध ले, तन को बिसार के
ऐसी छवि कहाँ देखि चारों धाम?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

मायापति जो-२, स्वयं संसार के
पिता के प्रेम में भटके गली-गली, गावं।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

जीवन भर रखा एक पत्नी -व्रत
इससे बड़ी औरत की और क्या चाह?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

जिसके ह्रदय में, कैकई -कौशल्या,
लक्ष्मण -विभीषण, हैं सब एक सामान।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

अपने माता-पिता को मत ताड़िये
वरना छलकेंगें आंसू आँखों से हर एक रात.
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

एक ही जीवन है सबका
प्रेम में ना तोड़िये कभी विश्वास।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

संघर्ष से ही बदलता है मानव-जीवन में
हर अंत और परिणाम।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

Dedicated to the #RamJanam #BhoomiPujan for #RamMandir in #Ayodhya.

परमीत सिंह धुरंधर

July 30, 2020-Happy Begam Day


मोहब्बत मुझे होती नहीं
और शरारत उन्हें आती नहीं
पर दिल हैं दुआओं में मेरा
की बेगम खिलाना मुझे छोड़ती नहीं।

कभी लड़ कर, कभी रो-रोकर
कभी सज-संवर कर, इठलाकर
थाली परोसना वो भूलती नहीं।

सच्ची मित्र, सच्ची सखा वो ही है
जो हर दिन गाली देने पर भी
मेरे लिए मछली तलना
चूल्हे पे गर्मी में भी, भूलती नहीं।

तो खिलाओ, पिलाओ
अपनी बेगम को दोस्तों
जैसे खिलाते -पिलाते हो
दूसरों की बेगम को दोस्तों।

Rifle Singh Dhurandhar

Father and Ex


I missed my father
More than my ex
As that was the best father-son pair
That was selected by Nature.

My ex and I
Were just a choice made by us
And we were still looking
To find the best.

The love between my father and me
Was blind
Without any expectation
Full of appreciation and enjoyment.

The love with my ex
Was a force, which strength was
Proportional to my success rate
But my success rate was inversely proportional
To the availability of another successful man.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता और मेरा प्रेम


पिता और मेरा प्रेम
जैसे गंगा की लहरों पे
उषा की किरणें
और प्रकृति मुस्करा उठी.

हर्षित पिता मेरी उदंडता पे
उन्मादित मैं उनकी ख्याति पे
पिता -पुत्र की इस जोड़ी पे
प्रकृति विस्मित हो उठी.

अभी जवानी चढ़ी ही थी
अभी मैं उनके रथ पे चढ़ा ही था
की प्रकृति ने
विछोह की घड़ी ला दी.

Rifle Singh Dhurandhar

The day I turned 18


The day I turned 18
The world was changed
I started enjoying the mirror more than the wind.
I understood the relationship
Of the flower and bumblebee
Without reading the chapter on pollination.

I loved the change I was witnessing
Inside and outside of my body
Everything was like a slow music
Or like a water stream
Until I was forced on bed
To teach what love is.

Rifle Singh Dhurandhar