तेरी मस्त निगाहों से, हाँ पी कर देखा है,
दिल जलता है रातों में, जब होता अकेला है.
चाँद की चांदनी, भाती नहीं मुझे अब,
जब से तेरे रूप का नजारा देखा है.
मदिरा को भी पी कर, प्यासा है परमित,
जब से तुझको ओठों , से लगाकर देखा है.
तेरी मस्त निगाहों से, हाँ पी कर देखा है,
दिल जलता है रातों में, जब होता अकेला है.
चाँद की चांदनी, भाती नहीं मुझे अब,
जब से तेरे रूप का नजारा देखा है.
मदिरा को भी पी कर, प्यासा है परमित,
जब से तुझको ओठों , से लगाकर देखा है.
🙂
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