अजी आप थीं,
बगल में, इसलिए,
मैं भूखा ही रह गया,
खाली जाम ओठों से,
लगा के.
अजी आप थीं,
बगल में, इसलिए,
मैं सोता ही रह गया,
खुली आँखों से,
सपने सजाते- सजाते।
एक बार ही सही,
आपने रखा जो हाथ,
मेरे सीने पे,
हर लम्हा जी गया परमीत,
बस यूँ ही पास आते-आते.