ना परमीत ही रहा, ना Crassa ही रहा


पलकों का तेरे ना वादा ही रहा
ना परमीत ही रहा, ना Crassa ही रहा.
तू थाम रही है जाने अब किसकी हाँ बाहें
ना वो शर्म ही रही, ना वो घूँघट ही रहा.

तूने ही हमको मयखाने से लेकर
मंदिर की सीढ़ियां चढ़ाई थी कभी
अब ना वो देवी ही रहीं, ना साकी ही रहा.
पलकों का तेरे ना वादा ही रहा
ना परमीत ही रहा, ना Crassa ही रहा.

मासूम नयन तेरे और भोले चेहरे से
ना जाने किन-किन को यहाँ धोखा ही मिला?
क्या वफ़ा करे मोहब्बत में कोई ?
जिसकी किस्मत में तू महबूब है मिला।
पलकों का तेरे ना वादा ही रहा
ना परमीत ही रहा, ना Crassa ही रहा.

परमीत सिंह धुरंधर 

मोहब्बत


दर्द में उनसे तू शिकायत न कर
ये शहर है उनका, तू बगावत न कर.
मिलेंगे तुझे कई हुस्न इस सफर में
यूँ ठहर कर उनसे मोहब्बत न कर.

परमीत सिंह धुरंधर

बेताब हैं बनने को दादी


चंद – मुलाकातों में दिल भर गया सनम का
अब गैरों के दिल को बहलाया जाएगा।

शौक ऐसे चढ़ा है दिल पे उनके लबों का
ए साकी जाम ये हलक से उतर न पायेगा।

इन 18 सालों में वो बेताब हैं बनने को दादी,
मेरी इस बेताबी को अब नहीं मिटाया जाएगा।

ऐसे रौशन कर रही हैं वो अपने घर को
मेरे आँगन से अन्धेरा मिट न पायेगा।

और क्या होगी सितम की रात इससे बढ़कर?
मेरा दिया, मेरे घर को ही जला जाएगा।

ना पूछों दर्दे-दिल की दवा हमसे
तुमसे ऐसा दर्द न उठाया जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर


वो बदल लेती हैं काजल, हर रात अपनी आँखों का
नए सफर की शुरुआत, पुरानी यादों से नहीं होती।

She changes collyrium of her eyes every night
A new journey does not begin with old memories.

परमीत सिंह धुरंधर 

घूँघट में छुप-छुप कर


धुप में ना निकलो, यूँ हजार रंग ले कर
तड़पती है दुनिया दोपहर में जल-जल कर.

सबकी निगाहें प्यास में डूबीं हैं
उसपे ऐसे न तडपावों तुन यूँ घूँघट में छुप-छुप कर.

मन है व्याकुल, जाए तो जाए किधर
भटकावों ना तुम हमें यूँ राहें बदल-बदल कर.

परमीत सिंह धुरंधर 

अंततः उन्हें कोई भाया था


खुले दिल से
अरमानों को सजाया था
कुछ टूट गए, कुछ सूख गए
मैंने दिल ही कुछ ऐसे लगाया था.

हम तन्हा रह गए
कोई शिकवा नहीं
अंततः उन्हें कोई भाया था
जिसके संग
उन्होंने परिणय-पत्र छपवाया था.

परमीत सिंह धुरंधर

परफेक्ट प्यार


उम्र भर जो भागी एक परफेक्ट प्यार को
अब लिख रहीं हैं की प्यार परफेक्ट नहीं होता।
इससे बड़ी प्यास क्या होगी जीवन में?
प्यार पाकर भी कोई प्यार नहीं पाता।

पिता की गोद छोड़कर जो भागी थी प्यार में
उसके चार -चार बच्चों की माँ बनके भी आनंद नहीं आता.
इससे बड़ी प्यास क्या होगी जीवन में?
प्यार पाकर भी कोई प्यार नहीं पाता।

जुल्फों में बांधकर जिसने कइयों को डुबाया है
अजब है उस कातिल को अब क़त्ल का मजा नहीं आता.
इससे बड़ी प्यास क्या होगी जीवन में?
प्यार पाकर भी कोई प्यार नहीं पाता।

ये शहर छपरा सभी का है सिर्फ मेरा ही नहीं
मगर हर किसी के नाम में छपरा नहीं होता।
इससे बड़ी प्यास क्या होगी जीवन में?
प्यार पाकर भी कोई प्यार नहीं पाता।

परमीत सिंह धुरंधर