इंसानो की बस्ती का हर रंग फीका है,
हर शख्स को सूरज से ही शिकवा है.
सब कह रहे है चाँद में दाग ही नहीं,
सूरज ने अपनी किरणों से इसे झुलसाया है.
हर मोड़ पे गूंजती है सैकड़ो आवाजें,
हर शख्स ढूंढता है चोर कहाँ है.
सब कह रहे है की सूरज ने धोखा किया है,
इस उजाले में सबका रंग दीखता है.
हर शख्स के दामन में रंग काला है.,
कितना ढूंढा दिया लेकर, हर गली, हर कूचे में.
मैं अकेला हूँ तन्हा आज भी,
मेरे रंग का कोई मीत नहीं मिला है.
खूबसूरत हैं वो लोग जो भीड़ में छुपे हैं,
धुरंधर सिंह की किस्मत में बस ये ख़्वाब लिखा है.