मै ऐसा नहीं


मै ऐसा नहीं जो आसमा के चाँद को पसंद आऊं,
मै ऐसा नहीं जो सितारों की महफ़िल में नज़र आऊं,
मै छोटा सा एक दरिया हूँ,
जिसकी लहरों में कोई धार नहीं,
मै ऐसा नहीं की किनारों को तौल दूँ.
मै जैसा भी हूँ, जहाँ भी हूँ,
सींच दूंगा इस मिटटी को,
सुख जाने से पहले दे जाऊंगा वो हरियाली परमित ,
जो नसीब नहीं सागर के बांहों में किसी को दोस्तों.

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