तेरी पलकों पे सबेरा, तेरी पलकों से मेरी शाम है,
पर मेरी किस्मत में एक रात ही नहीं।
रोजा रखता हूँ, सजदा करता हूँ,
सब दिया मौला ने पर मेरी किस्मत में जन्नत ही नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी पलकों पे सबेरा, तेरी पलकों से मेरी शाम है,
पर मेरी किस्मत में एक रात ही नहीं।
रोजा रखता हूँ, सजदा करता हूँ,
सब दिया मौला ने पर मेरी किस्मत में जन्नत ही नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर