मोहब्बत


घर बसा लेने को वो कहती हैं मोहब्बत,
और आज भी एक ही घर में रहती है.
सजाती हैं – सवारती हैं दीवारों को दीवाली में,
हम फ़कीर दिया ना जलाये, तो ठोकर खा जाती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

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