गहराई


बहुत जलील हुआ हूँ पर अब भी मज़ा आता है.
हुस्न ही उनका ऐसा है, देखने के बाद नशा आता है.
मत पूछ क्या पाता हूँ बिना बाँहों में गए उनके,
लहरों में उतर के कौन सागर की गहराई नाप के आता है.

परमीत सिंह धुरंधर

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