हाले-करम


अब खुदा भी नहीं पूछता मेरा हाले-करम,
अकेला रह गया हूँ उठा के तेरा जुदाई का गम.
मोहब्बत कभी भी इतनी शिद्दत से मत कर,
की उनका बिछुरना बन जाए जिंदगी का आखरी सितम.

परमीत सिंह धुरंधर

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