खजाना


अकेला हूँ पर खुशियों का खजाना है.
कल तक सूखे इस उपवन में आज,
फिर से भौरों का आना जाना है.
मैं तो अँधेरे में हूँ पर आज पता चला,
हम से कितनों की उमिद्दों का जमाना है.

परमीत सिंह धुरंधर

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