अब मुझसे मत पूछ मेरा शौक तू,
ये ही तो दुःख है की आज भी मेरा शौक तू.
कोई गिला नहीं तेरी इस माशूमियत से,
हर बार हाल दिल पूछ कर बन जाता है अनजान तू.
परमीत सिंह धुरंधर
अब मुझसे मत पूछ मेरा शौक तू,
ये ही तो दुःख है की आज भी मेरा शौक तू.
कोई गिला नहीं तेरी इस माशूमियत से,
हर बार हाल दिल पूछ कर बन जाता है अनजान तू.
परमीत सिंह धुरंधर