अब मैं महफ़िल में नहीं,
मयखानों में बैठा हूँ,
महफ़िल की शान तो वो हैं,
जिनकी यादो का ये जाम,
मैं उठाये बैठा हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
अब मैं महफ़िल में नहीं,
मयखानों में बैठा हूँ,
महफ़िल की शान तो वो हैं,
जिनकी यादो का ये जाम,
मैं उठाये बैठा हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर