मेरी धमनिकाओं में रक्त प्रवाहित है,
तुम्हारी साँसों की चाहत में.
और मेरी साँसों में स्पंदन प्रज्जवलित है,
सिर्फ तुम्हारी धमनिकाओं की आहट से.
परमीत सिंह धुरंधर
मेरी धमनिकाओं में रक्त प्रवाहित है,
तुम्हारी साँसों की चाहत में.
और मेरी साँसों में स्पंदन प्रज्जवलित है,
सिर्फ तुम्हारी धमनिकाओं की आहट से.
परमीत सिंह धुरंधर