जवानी के ढलने का इंतज़ार कर रहा हूँ,
वो उम्र देख रही हैं मेरी,
और मैं दिल से जवान हो रहा हूँ.
कल तक जो छत पे निकलती थीं,
गलियों में देखती थीं.
अब घंटो बैठती हैं आईने के पास,
और मैं उनकी गलियों में,
चक्कर लगा रहा हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
जवानी के ढलने का इंतज़ार कर रहा हूँ,
वो उम्र देख रही हैं मेरी,
और मैं दिल से जवान हो रहा हूँ.
कल तक जो छत पे निकलती थीं,
गलियों में देखती थीं.
अब घंटो बैठती हैं आईने के पास,
और मैं उनकी गलियों में,
चक्कर लगा रहा हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर