चार-सहेलिया


राते आइलन हमर बलमुआ, चाँद पे तेल लगा के,
अंग-अंग हिला गइलन, हमके भांग पिला के.
राते आइलन हमर बलमुआ, अंखिया के ऐनक तुड़ा के,
भौजी के झूला गइलन, मुखड़ा हमार बता के.
राते आइलन हमर बलमुआ, दारु पे दारु चढ़ा के,
सारा माल लूट लेहलन, पड़ोसी के रसोई में जाके.
राते आइलन हमर बलमुआ, मुह में पान चबा के,
सउँसे देहिया लाल कइलन, हमके गुलाब बता के.

परमीत सिंह धुरंधर

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