दो तेरी पलकें वो रानी,
दो ही मेरे ख़्वाब हैं.
छोटे से इस आसमान का,
तू ही एक चाँद है.
दो तेरे नखरे वो रानी,
दो ही मेरे अरमान हैं,
इस छोटी सी सल्तनत की,
तू ही एक तख्तो-ताज है.
परमीत सिंह धुरंधर
दो तेरी पलकें वो रानी,
दो ही मेरे ख़्वाब हैं.
छोटे से इस आसमान का,
तू ही एक चाँद है.
दो तेरे नखरे वो रानी,
दो ही मेरे अरमान हैं,
इस छोटी सी सल्तनत की,
तू ही एक तख्तो-ताज है.
परमीत सिंह धुरंधर