तेरी चाल पे तो तख्ते-ताज पलट गए,
ये हम हैं जो फिर भी संभल गए.
तुझे पाने को बाह गयी खून की नदियां,
जाने कैसे इस सैलाब से हम निकल गए.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी चाल पे तो तख्ते-ताज पलट गए,
ये हम हैं जो फिर भी संभल गए.
तुझे पाने को बाह गयी खून की नदियां,
जाने कैसे इस सैलाब से हम निकल गए.
परमीत सिंह धुरंधर