पंछी


तेरी नजर के दीवाने सभी,
लूटेंगे सरसों के दाने सभी।
मेरे चबूतरे पे आके तू चर,
मुझ सा कबूतर ना मिलेगा कहीं।
तेरी कमर के दीवाने सभी,
खाने को झटके हैं तैयार सभी।
मेरे घोंसलें में तू आके रहा कर,
मुझ सा पंछी न होगा कहीं।

परमीत सिंह धुरंधर

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