जवानी के ढल जाने का और कहानी के मिट जाने का असर तभी है, जब वो अपूर्ण हो. सम्पूर्णता तो भगवान में भी नहीं, फिर मनुष्य का ये एहसास ही एक छलावा है.
परमीत सिंह धुरंधर
जवानी के ढल जाने का और कहानी के मिट जाने का असर तभी है, जब वो अपूर्ण हो. सम्पूर्णता तो भगवान में भी नहीं, फिर मनुष्य का ये एहसास ही एक छलावा है.
परमीत सिंह धुरंधर