हंसुआ ई चलता हमरा जिगर पे,
ऐसे मत मुस्का, आज बारु अकेले,
चउरा के खेत में.
मन करअता की आज रोक ली रात में,
खेत औगरल जाइ दूनी मिलके साथ में.
परमीत सिंह धुरंधर
हंसुआ ई चलता हमरा जिगर पे,
ऐसे मत मुस्का, आज बारु अकेले,
चउरा के खेत में.
मन करअता की आज रोक ली रात में,
खेत औगरल जाइ दूनी मिलके साथ में.
परमीत सिंह धुरंधर