किस्मत


आँखों की किस्मत के क्या कहने,
धुप में भी छावं लगे.
दुप्पट्टा जब सर से ढलक के,
उनके सीने पे ठहरे।
कौन कम्बखत,
जन्नत की सैर चाहता है.
बस हवा का झोंका, एक पल को,
उनका दुप्पट्टा उड़ा दे.

परमीत सिंह धुरंधर

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