मीठे दीये


तेरे नैना मिलते है जो मेरे नैनों से,
तो पूरी रात जलते हैं ये दीये।
कैसे मैं कह दूँ,
मीठे लगते है मुझे ये दीये।

परमीत सिंह धुरंधर

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