हर खूबसूरत गली,
मंजिल नहीं होती।
कुछ राहें,
सदा अँधेरे में होती हैं,
पर उनपे,
जिंदगियां बर्बाद नहीं होती।
आंसू बहाने से,
आँखे ह्रदय के करीब नहीं होती।
हुस्न वाले मोहब्बत में,
किसी एक की नसीब में नहीं होती।
दस – घाटों से गुजरने के बाद,
नदिया प्यासी होती है सागर के लिए.
भरी जवानी में हुस्न,
चारदीवारी में नहीं बंधती।
परमीत सिंह धुरंधर