नसीबों का खेल है जिंदगी,
हमने उसे वसूलों में बाँध के रख दिया,
तुम जिस मुकाम पे पहुँच के इतरा रहे हो,
हमने कब का उससे ठोकरों में तौल के रख दिया।
My life is not dependent on the chance of success, it depends how much resistance I will get in the path.
परमीत सिंह धुरंधर