गमें – रात का हम कुछ यूँ इंतज़ाम करते हैं,
यारों की टोली, हुस्न वालों के किस्से,
कबाब और हाथों में जाम रखते हैं.
गम क्या करें जिंदगी की कोई साथ नहीं है,
हम तो हर रात तुझे जीने का नया ख़्वाब रखते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
गमें – रात का हम कुछ यूँ इंतज़ाम करते हैं,
यारों की टोली, हुस्न वालों के किस्से,
कबाब और हाथों में जाम रखते हैं.
गम क्या करें जिंदगी की कोई साथ नहीं है,
हम तो हर रात तुझे जीने का नया ख़्वाब रखते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर