कभी मिलो न तुम,
आँखों पे डाल के पर्दा।
सारी रात रखेंगे,
हम दो हाथ का फासला।
दिए सा बन के मन जलता रहेगा,
पर हम ना पट खोलेंगें,
ना तुम लबों से ही कुछ कहना।
कभी मिलो न तुम,
आँखों पे डाल के पर्दा।
परमीत सिंह धुरंधर
कभी मिलो न तुम,
आँखों पे डाल के पर्दा।
सारी रात रखेंगे,
हम दो हाथ का फासला।
दिए सा बन के मन जलता रहेगा,
पर हम ना पट खोलेंगें,
ना तुम लबों से ही कुछ कहना।
कभी मिलो न तुम,
आँखों पे डाल के पर्दा।
परमीत सिंह धुरंधर