एक दिन ऐसा कलजुग आएगा


रामचन्द्र जी कह गए सिया से, एक दिन ऐसा कलजुग आएगा।
वक्षों पे खेलेंगे कुत्ते,और कुत्तों पे वक्ष होगा।
नारी-हितेषी भटकेगा गलियों में ठोकर खाते,
और जो दलेगा नारी को, वो उसकी बाहों में होगा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment