जब से तुम जवान हुई


जब से तुम जवान हुई,
सारा शहर परेशान हुआ.
मयखाने तक सुख गए,
जो तेरा दीदार हुआ.
बादलों ने मंडराना छोड़ा,
भौरों ने कलियों संग,
गुनगुनाना छोड़ा।
आँखों में उतर आएं हैं,
आसमान के सारे तारे।
जब से दुपट्टा तेरा,
कुछ ज्यादा ही ढलकने लगा.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment