तुम्हे इतने प्यार से रखूँगा समेट के,
की तुम करवट भी लोगी तो, मेरे बाहों में.
मेरी ओठों से तुम्हारी ओठों का न होगा फासला,
तुम साँसे भी लोगों तो मेरी साँसों से.
परमीत सिंह धुरंधर
तुम्हे इतने प्यार से रखूँगा समेट के,
की तुम करवट भी लोगी तो, मेरे बाहों में.
मेरी ओठों से तुम्हारी ओठों का न होगा फासला,
तुम साँसे भी लोगों तो मेरी साँसों से.
परमीत सिंह धुरंधर