इंसानियत


रौशनी नहीं, केवल रोशनदान चाहिए,
अब मनुष्य को बस एक मकान चाहिए।
भटके हए हैं इंसान यहाँ,
इनकी इंसानियत को एक हैवान चाहिए।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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