हम उनके शहर में आ गए हैं


बनेंगे अब रिश्ते मेरे धुआंधार,
की हम भी बेईमानों में आ गए हैं.
पूछने लगी हैं अब वो भी रोज मेरा हाल,
की हम उनके शहर में आ गए हैं.
मेरे ख़्वाबों को तोड़ के,
कर रहा है बुलंद मेरे इरादें, ये जमाना,
की हर फलसफा सिख कर जिंदगी का,
हम भी अब गुनाहगारों में आ गए हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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