मोहब्बत नागिनों का है आभूषण दोस्तों


मोहब्बत नागिनों का है आभूषण दोस्तों,
इन अधरों के पीछे छुपा है गरल दोस्तों।
त्वचा है, निसंदेह इनकी बहुत ही मुलायम,
पर अंदर का दिल, है कठोर दोस्तों।
कितने रोएं हैं काँधे पे सर रख के मेरे,
और कितनों ने मिटाया है अपना जीवन दोस्तों।
नागिन कल भी डसती थी, नागिन कल भी डसेगी,
चाहे जितना भी उनको पिला लो शहद दोस्तों।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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