ग़ालिब बना दिया


जिंदगी के शौक ने काफिर बना दिया,
मजनू बनने चले थे, ग़ालिब बना दिया।
इस कदर उनके ओठों की तलब हुई,
भरी जवानी में ही शराबी बना दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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