तो फिर से वो मंजिल नजर आई


बड़े दिनों बाद याद तुम्हे मेरी आई,
चलो कुछ नहीं,
आखिर तुम परदे से बाहर तो आई.
हम भी मसरूफ थे,
जाने किस मंजिल को पाने के लिए?
तुम दिखे,
तो फिर से वो मंजिल नजर आई.

 

परमीत सिंह धुरंधर

When I saw your face, I realized my mistake that I had chosen wrong path. My goal is you and I don’t know how I forgot that.

 

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