तुम्हारी लबों से होकर गुजरा जो पल,
फीका लगने लगा ये ताजो – ये तख़्त।
एक पल में सब गुरुर बिखरने लगा,
कितना बड़ा फकीर है ये शहंशाहे-हिन्द।
परमीत सिंह धुरंधर
Month: July 2016
ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो
माई कहले बारी,
तहसे हम बात ना करीं,
की तू बड़ा बदनाम बड़ा हो.
हमार माई कहले बारी,
तहके घर ले चलीं,
की ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो.
चलअ, हटअ पीछे, हमके मत छेडअ हमके,
बाबुल से पहले मांगअ ई हाथ हो.
देखअ ताहरा खातिर कंगन ले आइल बानी,
पाहिले पहनाएम ई ताहरा हाथ हो.
देखअ हाथे तक रहअ, पहुँचा मत धरअ,
हमार धड़कअता अब दिल हो.
त छोड़अ माई – बाबुल के चिंता,
अब हो जाएगअ सार खेल हो.
परमीत सिंह धुरंधर
मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं
तेरी आँखे मुझसे कह रही है,
यूँ साँसों की दूरी अब अच्छी नहीं।
तो छोड़ दे ये शर्म ए गोरी,
तेरी कोरी जवानी अब अच्छी नहीं।
कब तक संभालेंगे बाबुल तुझको,
ढलकने लगा है तेरा आँचल।
यूँ मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं।
अंगों में तेरे इतना कसाव,
जैसे मन में छुपा हैं कोई डर.
यूँ डरती – खामोश जवानी अच्छी नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
किसी भी हुस्न में ऐसी विरह की आग नहीं
हम चाहें हुस्न वालों को,
मेरी ऐसी औकात नहीं।
सीधे -सादे इंसानों के लिए,
हुस्न के पास कोई सौगात नहीं।
इससे अच्छा की लगा दे जिंदगी,
अगर खुदा की राह में,
तो कोई बरक्कत हो जाए.
मक्कारी के अलावा,
हुस्न की झोली में कुछ भी नहीं।
कल रात मेरी कलम ने मुझसे कहा,
२५ दिन हो गए,
तुमने मुझे छुआ तक नहीं।
किसी के जिस्म को क्या छुऊँ?
किसी भी हुस्न में,
ऐसी विरह की आग नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
There is no desire left for you as my brain feels attraction for creativity and simplicity.
तुम्हारी आँखे

मेरे इरादे बदल देतीं हैं तुम्हारी आँखे,
मेरे सपने सजा देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
दूरियां जो हैं हमारे दरमियाँ,
उसे कितना छोटा बन देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
सम्पूर्ण से लगते इस जीवन को,
तुरंत, एक पल में, अधूरेपन का एहसास,
दिला देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
कितना भी मयखाने से पी लूँ, उठाकर,
सीने में प्यास जगा ही देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
तुम ज्वाला बनके धधकती रहो,
जलाती रहो, मिटाती रहो.
बस यूँ ही कभी-कभी,
हमसे लड़ा लो तुम्हारी आँखे।
परमीत सिंह धुरंधर
Its your eyes, which is keeping me alive. Its your eyes which makes me to try for my dream. Its your eyes which makes me to feel your breath, your closeness. All my feelings, my desire and my energy is due to your eyes. Its only your eyes …only your eyes….that is my life……
Crassa और Jwala

Crassa और Jwala की जोड़ी कैसी,
बिना आँखों में कोई शर्म के,
बस मस्ती ही मस्ती।
तो धधकने दो, ज्वाला को यूँ ही.
पसीना बहा देंगे मंजिल के लिए,
खून का कतरा, आँखों में छलक आये.
तो भटकने दो, Crassa को यूँ ही,
बस्ती ही बस्ती।
परमीत सिंह धुरंधर
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तो फिर से वो मंजिल नजर आई
बड़े दिनों बाद याद तुम्हे मेरी आई,
चलो कुछ नहीं,
आखिर तुम परदे से बाहर तो आई.
हम भी मसरूफ थे,
जाने किस मंजिल को पाने के लिए?
तुम दिखे,
तो फिर से वो मंजिल नजर आई.
परमीत सिंह धुरंधर
When I saw your face, I realized my mistake that I had chosen wrong path. My goal is you and I don’t know how I forgot that.
चरित्र
उसने मोहब्बत में ऐसे दिया सहारा,
नाम किसी का, और दिल लिया हमारा।
पैसों के खेल में मेरी ही हुई पराजय,
पर चरित्र के मैदान में सबको था पछाड़ा।
परमीत सिंह धुरंधर
भाभी
भीड़ तो बहुत थी,
मगर खालीपन दिल का,
दोस्तों के संग मिलने पे मिटा।
खाते ही रहे जीवन भर,
मगर भूख उस शाम,
भाभियों के हाथ से मिटा।
परमीत सिंह धुरंधर
The life is complete when it is with friends and family.
पंखहीन परवाज
एक चूहे ने खोद -खोद के,
खोखला पहाड़ कर दिया।
मगर एक चुहिया की आँखों ने,
उसको भी बेचैन कर दिया।
एक कबूतर ने पंख फैला के,
आसमान चुम लिया,
मगर एक मादा कबूतर ने,
उसको भी पंखहीन परवाज कर दिया।
इश्क़ कर तो फिर खुदा की चाह ना कर,
इश्क़ में तो खुदा भी बेबस है।
परमीत सिंह धुरंधर
There is no happy end in love.