बहू हमारी रजनी कान्त,
पकड़ लेती है सबके कान.
करती है ऐसे – ऐसे काम,
कसी रहती है,
हमेसा सास- ननद पे लगाम।
घर में विजली सी चमकती,
प्रेम में शहद सी घुलती।
सर-दर्द में, बन जाती है,
ठंढा -ठंढा बाम.
बहु हमारी रजनी कान्त,
पकड़ लेती है सबके कान.
परमीत सिंह धुरंधर
This is written for the TV serial Bahu Hamari Rajni Kaant which is running currently on Life OK channel.
http://www.desiserials.tv/watch-online/life-ok/bahu-hamari-rajni-kant-life/